कुंवर प्रताप सिंह नागर
कुंवर प्रताप सिंह नागर, श्री सुखदेव सिंह के पुत्र, कस्बा बहसूमा (रानी का महल) के निवासी हैं। इन्होंने कानपुर विश्वविद्यालय से एम.एससी. की परीक्षा उत्तीर्ण की है। इन्होंने ‘राजा नैन सिंह स्मारिका’ भाग-1 वर्ष 2001 में लिखी तथा कई महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं। इन्होंने इंटर कॉलेज में राजा साहेब के नाम पर मुख्य द्वार का नामकरण करवाया। कस्बा बहसूमा नगर रियासत में राजा नैन सिंह के नाम पर मार्ग पास कराया तथा पांडेबर मंदिर व कर्ण मंदिर में द्वार लगवाए और राव कदम सिंह मार्ग का नामकरण नगर निगम मेरठ में पास कराया।
राजा नैन सिंह स्मारक समिति का गठन
16 अप्रैल 1986 ई. को तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायणदत्त तिवारी जी के निर्देश पर संसदीय कार्य एवं गृह राज्यमंत्री बाबू हुकुम सिंह जी जब हस्तिनापुर में जैन समाज के एक समारोह में आए थे, मैं भी उनके साथ था। जब जैन समाज ने राजा नैन सिंह का इतिहास बखान किया और उन्होंने बताया कि दिगंबर जैन बड़े मंदिर की नींव स्वयं राजा नैन सिंह जी ने रखी थी, तो मैं अभिभूत हो गया था। मैंने अपने मन में सोचना शुरू किया कि हमने पूर्वजों के प्रति कुछ नहीं किया। तभी माननीय मंत्री जी बाबू हुकुम सिंह के निर्देशों में राजा साहब के आदर्शों का प्रकाशन करने का आदेश हुआ। तभी मैंने अपने कुल पूज्य बाबा कुंवर विधिपति नागर से राजा नैन सिंह स्मारक समिति के गठन का अनुरोध किया। राजा नैन सिंह जी की जयन्ती के अवसर पर 21 नवम्बर 1986 ई. को कुंवर विधिपति नागर की अध्यक्षता में राजा नैन सिंह स्मारक समिति का गठन किया गया। अभी तक राजा नैन सिंह स्मारक समिति द्वारा पांच किसान सम्मेलन किए गए हैं।
राजा नैन सिंह स्मारक समिति द्वारा किए गए स्मरणीय कार्य
राजा नैन सिंह स्मारक समिति द्वारा वर्ष 1986 से वर्ष 2021 तक किए गए कार्य निम्नलिखित हैं:
-
27 फरवरी 1986 ई. को राजा नैन सिंह की स्मृति में समिति की पहली बैठक बहसूमा गाँव के चौपाल पर समिति के सचिव धर्मेंद्र सिंह नागर की मौजूदगी में हुई, जिसकी अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष बृजपाल सिंह भाटी ने की।
-
समिति द्वारा निर्णय लिया गया कि राजा नैन सिंह के नाम पर किसी स्मारक का निर्माण किया जाए।
-
समिति द्वारा पहला स्मारक निर्माण कार्य बहसूमा गाँव में शुरू किया गया। राजा नैन सिंह की स्मृति में 27 फरवरी 1986 ई. को चौपाल पर (राजकीय प्राथमिक विद्यालय) स्थापित किया गया। इसमें प्रमुख रूप से सामाजिक कार्यकर्ता एवं कई सम्मानित व्यक्ति उपस्थित रहे।
-
दूसरा किसान सम्मेलन भी बहसूमा में दिनांक 27 नवम्बर 1991 ई. को आयोजित किया गया। सम्मेलन राजा नैन सिंह के जन्म दिवस पर आयोजित किया गया। इसमें भी माननीय हुकुम सिंह जी पधारे।
-
वर्ष 1992 में बहसूमा की मुख्य सड़क पर (शिव मंदिर स्थित है) इसी मंदिर में सन्यासी अटर सटर नाम से विख्यात अर्थात राजा रणबीर लड्ढौरा भी इसी मंदिर में रहे। स्वामी कृष्णदेव जी महाराज ने सन्यासी अटर सटर की सराहना की थी। दुर्गा मंदिर एवं अन्य मंदिर के निर्माण हेतु लगभग 27000 हजार रुपये स्वयं सचिव श्री प्रताप सिंह नागर ने दान दिए। राजा नैन सिंह समिति का शिला लेख लगा है।
-
वर्ष 2000 ई. में सर्वप्रथम “राजा नैन सिंह स्मारिका” नामक पुस्तक (सचिव) प्रताप सिंह नागर द्वारा लिखी गई। इस पुस्तक का विमोचन 17 मार्च 2001 ई. में राजा नैन सिंह की पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित किसान सम्मेलन में किया गया। यह सम्मेलन (नव जीवन इंटर कॉलेज) के मैदान में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में भी माननीय हुकुम सिंह जी संसदीय एवं कार्य मंत्री पधारे। इस अवसर पर (सचिव) प्रताप सिंह नागर द्वारा राजा नैन सिंह के नाम से मुख्य द्वार के लिए 51000 हजार रुपये दान दिए। इसका उद्घाटन भी माननीय मंत्री जी ने किया। इसी सम्मेलन में मंत्री जी ने विशेष निधि कोटे से 3,50,000 हजार रुपये विद्यालय को दान दिलाए।
-
चौथा किसान सम्मेलन 27 नवम्बर 2002 को आयोजित किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि माननीय अवतार सिंह भड़ाना जी (सांसद) पधारे। यह सम्मेलन हस्तिनापुर में (पांडेबर मंदिर) के प्रांगण में आयोजित किया गया। जिसमें (सचिव) प्रताप सिंह नागर ने मंदिर प्रांगण में पक्का एवं मर्द (मर्दाना स्थल) के लिए 1,24,000 रुपये दान दिए थे। समिति का पक्का लगा हुआ है। इसी रात को माननीय सांसद द्वारा राजा नैन सिंह द्वार का निर्माण कराया और कस्बा-बहसूमा में समिति के (सचिव) प्रताप सिंह नागर के अनुरोध पर मुख्य सड़क से रानी के महल तक मार्ग का नाम राजा नैन सिंह मार्ग रखा गया। नगर पंचायत बहसूमा की तत्कालीन अध्यक्षा श्रीमती राजेश ने किया।
-
पाँचवा किसान सम्मेलन मेरठ शहर में चौबीस अप्रैल को आयोजित किया गया। सम्मेलन 10 मई 2003 ई. को शहीद दिवस पर किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि-माननीय हुकुम सिंह जी तथा राज्यमंत्री माननीय नवाब सिंह नागर जी पधारे। (सचिव) प्रताप सिंह नागर के अनुरोध पर तत्कालीन महापौर शहीद अखलाक एवं उप-महापौर सुशील गुर्जर द्वारा, अमर शहीद राव कदम सिंह के नाम पर किला मार्ग पर जो कि जेल रोड के निकट मार्ग का नाम रखा गया। इसका उद्घाटन भी माननीय हुकुम सिंह जी ने किया।
“बड़े दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि पत्थर खंडित करके हटा दिया गया”
राव कदम सिंह मार्ग
मेरठ में तिराहा मोड़ पर एक रास्ता जेल मार्ग को जाता है। इसका दूसरा रास्ता किला परीक्षितगढ़ मार्ग को जाता है। उसी तिराहे पर नगर निगम-मेरठ के उप-महापौर सुशील गुर्जर के प्रयास से शहीद दिवस दिनांक-10 मई 2003 को तत्कालीन कृषि मंत्री (उत्तर प्रदेश) माननीय हुकुम सिंह जी द्वारा उद्घाटन किया गया। उनके साथ में सिंचाई राज्य मंत्री माननीय नवाब सिंह नागर जी और कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय, प्रधान प्रभुदयाल जी पूर्व-विधायक (खरखौदा) ने की। सभा का संचालन श्री सुरेन्द्र सिंह नागर एडवोकेट ने किया तथा कार्यक्रम के संयोजक कुंवर प्रताप सिंह नागर, (सचिव) राजा नैन सिंह समिति बहसूमा, मेरठ उपस्थित रहे।
किसान सम्मेलन
उपर्युक्त मंच द्वारा राजा नैन सिंह स्मारक समिति द्वारा 6 किसान सम्मेलन किए गए। इन 6 सम्मेलनों का खर्च (स्वयं) मेरे द्वारा वहन किया गया। इसमें समाज एवं मंच के अधिकारियों का सहयोग नहीं रहा। अंत में मेरा मनोबल तब और अधिक टूट गया जब मेरे द्वारा माननीय हुकुम सिंह जी से अनुरोध किया गया था कि मेरठ कृषि विश्वविद्यालय का नामकरण कुंवर कदम सिंह जी के नाम पर करने की मांग की थी। परन्तु अरुण सिंह जी माननीय मंत्री जी के निकट थे। उनके सामने मेरी नहीं चली। उन्होंने इस विश्वविद्यालय का नाम लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर कर दिया। वे भी हमारे पूर्वज हैं। परन्तु स्थानीय दृष्टि से कुंवर कदम सिंह जी का गौरव अधिक था। क्योंकि सरदार पटेल जी के नाम मेरठ मेडिकल कॉलेज का नाम भी है।
“मैंने एक पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय राजनाथ सिंह जी को लिखा था। मुख्यमंत्री कार्यालय से एक पत्र प्राप्त हुआ, उस पत्र में लिखा था कि कृषि फाउंडेशन समिति के अध्यक्ष हुकुम सिंह जी हैं। आप उनके माध्यम से ही वार्ता करें। मेरे पत्र का प्रभाव इतना बड़ा था कि जब माननीय मुख्यमंत्री जी मेरठ कृषि विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने आए थे। तब मुख्यमंत्री जी ने राजा नैन सिंह जी का जिक्र किया तथा कुंवर कदम सिंह जी के बलिदान पर भी बोले थे।
तब मैंने एक पत्र अपने खून से लिखकर कुछ पंक्तियाँ कुंवर कदम सिंह जी के सम्मान में कृषि मंत्री उ.प्र. शासन को लिखी थी। उसमें माननीय मंत्री जी (P.R.O.) श्री लाल जी यादव जी को मेरा पत्र प्राप्त हुआ था। जब मेरा पत्र पहुँचा था, अगले दिन मुख्यमंत्री जी को कृषि विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने आना था। चूंकि उस समय बाबू हुकुम सिंह जी संसदीय कार्य विभाग मंत्री भी थे। इस वजह से वे व्यस्त थे। उनके (P.R.O.) यादव जी ने मेरा पत्र अगले दिन सुबह माननीय मंत्री जी को दिया। लेकिन उसी दिन माननीय मंत्री जी व माननीय मुख्यमंत्री जी को मेरठ कार्यक्रम में आना था। इसका प्रमाण मुझे तब ज्ञात हुआ जब माननीय मंत्री जी के मित्र श्यामलाल जी के पूर्व चेयरमैन रेशम चन्द्र गुप्ता जी का फोन मेरे पास आया। तभी (P.R.O.) का फोन आया। उन्होंने मुझे अवगत कराया कि निकट भविष्य में कहीं अन्य जगह का नामकरण कुंवर कदम सिंह जी के नाम पर किया जाएगा।
प्रथम किसान सम्मेलन
इस मंच के माध्यम से सर्वप्रथम राजधानी बहसूमा में 26 मार्च 1987 ई. को राजा नैन सिंह किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बाबू हुकुम सिंह जी मंत्री उ.प्र. शासन पधारे थे। और सरधना क्षेत्र के विधायक जकीरुद्दीन चौधरी ने अध्यक्षता की थी तथा संचालन विधायक हरशरण जाटव ने किया था।
पांचवाँ किसान सम्मेलन
इस मंच द्वारा पांचवाँ किसान सम्मेलन 10 मई, 2003 को नगर निगम मेरठ टाउन हॉल के मैदान में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में भी माननीय बाबू हुकुम सिंह कृषि मंत्री उ.प्र. शासन मुख्य अतिथि के रूप में पधारे। 10 मई, 2003 को 1857 क्रांति की वर्षगाँठ पर कुंवर कदम सिंह जी के नाम पर मेरठ नगर निगम, मेरठ द्वारा जारी किए गए मार्ग का शिलान्यास किया गया। मार्ग का शिलान्यास किला मार्ग से जेल मार्ग के तिराहे पर किया गया।
उपरोक्त मार्ग का शिलान्यास 10 मई, 1857 की वर्षगाँठ पर किया गया। इस सम्मेलन की अध्यक्षता माननीय नवाब सिंह नागर सिंचाई राज्य मंत्री उ.प्र. शासन द्वारा की गई। इसी सम्मेलन में मेरठ विश्वविद्यालय मेरठ संघ अध्यक्ष डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर का अभिनंदन किया गया। सभा का संचालन श्री सुरेन्द्र सिंह नागर एडवोकेट द्वारा संपन्न हुआ।
छठा किसान सम्मेलन
छठा किसान सम्मेलन 10 मई 2004 को दिल्ली रोड पर आयोजित किया गया। इसमें भी कई सम्मानित व्यक्ति उपस्थित रहे, (सचिव) धर्मेंद्र सिंह नागर द्वारा कई सम्मानित व्यक्तियों के सम्मान में राजकीय किसान सम्मेलन के प्रमुख यज्ञ का नाम दिल्ली बृजपाल सिंह कटारिया के नाम पर रखने की घोषणा की गई।
इस प्रकार सभी सम्मेलन (सचिव) धर्मेंद्र सिंह नागर द्वारा आयोजित किए गए। इन सभी सम्मेलनों का खर्च स्वयं मेरे द्वारा वहन किया गया। मेरे द्वारा “राजा नैन सिंह स्मारिका” नामक पुस्तक लिखी गई है। जो प्रकाशित हो चुकी है। मुद्रण ही शेष है।
परम पूज्य बाबा फूल सिंह जी के मठ पर विशाल भण्डारे का आयोजन
परम पूज्य बाबा फूल सिंह जी के मठ पर विशाल भण्डारे का आयोजन किया जा रहा है। इस भण्डारे का आयोजन राजा जैत सिंह की 11वीं सन्तान श्री कुंवर गजे सिंह नागर द्वारा किया जा रहा है।
भण्डारे के व्यवस्थापक कुलगुरू शेखर चन्द्र शर्मा जी तथा यज्ञ के पुरोहित पंडित प्रमोद शर्मा और यज्ञ के यजमान के रूप में कुंवर प्रताप सिंह नागर (सचिव) तथा प्रधान ईश्वर सिंह जी आदि उपस्थित थे। भण्डारे का संचालन कुंवर विरेन्द्र नागर, आदेश नागर, कपिल नागर, यतेन्द्र नागर, संजय नागर, संदीप अहलावत, सतबीर अहलावत, मुनेश अहलावत, अरूण कुमार चाहल द्वारा किया गया व अतरपाल सिंह, मास्टर राम सिंह जी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस भण्डारे के आयोजन के मुख्य अतिथि – नगर पंचायत बहसूमा के अध्यक्ष मान्यवर सोनू कुमार चाहल थे। उनके सभी सभासद उपस्थित थे। उनके अथक प्रयास से देव पुरूष बाबा फूल सिंह जी के मठ के लिए रास्ते का निर्माण कराया गया।
इस कार्य के लिए सभी क्षेत्रवासी आपका आभार प्रकट करते हैं तथा ग्राम-मोड़कला के सुधीर कुमार, प्रधान कृष्णपाल सिंह व जयबीर सिंह आदि का विशेष योगदान रहा और सम्पूर्ण ग्राम मोड़कला के सभी व्यक्तियों तथा महिलाओं का विशेष योगदान रहा। बहसूमा रियासत के राजकीय पंडित रामफल दत्त शर्मा और अन्नू पंडित जी द्वारा पूर्व से बाबा जी की सेवा की जाती रही है तथा गणमान्य व्यक्तियों का सहयोग रहता है।